Monday, 2 March 2015

headache

सिर या किसी अंग में खून जमा होने के कारण सिर-दर्द
विभिन्न औषधियों से चिकित्सा :-
ऐकोनाइट :-
रोग के सिर में दर्द होने के साथ ही चेहरा लाल हो जाए तथा आखें भी लाल हो जाए और सिर दर्द अधिक खतरनाक हो जाए तो ऐकोनाइट औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना अधिक लाभकारी है। इस औषधि का प्रयोग सिर-दर्द में करने पर इतना लाभ मिल जाता है कि इसके अन्य लक्षणों को दूर करने के लिए नक्स वोमिका, बेलाडोना या ब्रायोनिया औषधि का उपयोग किया जा सकें।
ब्रायोनिया :-
सिर या किसी अन्य अंग में खून जमा होने के कारण से सिर भारी हो, सिर इतना भारी लगे कि मानो फट जाएगा, रोगी का चेहरा भी पीला पड़ जाता है, मिजाज चिड़चिड़ा हो जाता है, सिर को जरा सा भी हिलाने से सिर-दर्द बढ़ जाए तो ऐसे रोगी के इस रोग को ब्रायोनियाऔषधि की 30 शक्ति से ठीक कर सकते हैं।
रस टॉक्स :-
सिर तथा अन्य अंग में खून जमा होने के कारण से होने वाले सिर दर्द को ठीक करने के लिए ब्रायोनिया, नक्स वोमिका या बेलाडोना औषधियों का उपयोग करने पर लाभ न मिले तो रस टॉक्स औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करने से फायदा मिलता है।
बेलाडोना :-
सिर दर्द होने के साथ ही गले की धमनियों में तपकन हो, सिर में हल्का-सा बोझ महसूस हो होता है, सिर भारी लगता है। इस प्रकार के लक्षण सिर या किसी अन्य अंग में खून जाम होने के कारण से हो तो रोग को ठीक करने के लिए बेलाडोना औषधि की 30 मात्रा का उपयोग करना लाभदायक होता है। खून जाम होने के कारण से सिर-दर्द होने पर यदि रोगी चेतना-शून्य हो जाए या बड़बड़ाए या शरीर की पेशियों में ऐंठन हो तो बेलाडोना औषधि से उपयोग करना लाभदायक है।
नक्स वोमिका :-
यदि बवासीर का रक्त-स्राव बंद हो जाने से या पेट की खून की नस-नाड़ियों (एबडोमिनल प्लेथोरा) के कारण से सिर-दर्द हो और इसका असर सुबह के समय में या भोजन करने के बाद शुरू हो तो नक्स-वोमिका औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करने से अधिक लाभ मिलता है।
पल्सेटिला :-

स्त्रियों की मासिकर्धम में रुकावट होने के कारण से सिर में दर्द हो तो पल्सेटिला औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए क्योंकि यह मासिकधर्म को जारी कर देता है। इस प्रकार के लक्षण होने पर रोग को ठीक करने के लिए ऐकोनाइट तथा बेलाडोना औषधि का उपयोग करना अधिक लाभकारी है।
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ग्लोनॉयन :-
अगर सिर में रक्त जमा होने के कारण से सिर-दर्द हो, चाहे गर्मी से हो, चाहे ठंड से हो, सारे शरीर में गर्मी महसूस हो, उच्च-रक्तचाप से सिर-दर्द हो, सिर को जरा-सा भी हिलाने से पागल कर देने वाला दर्द हो, कोई भी कार्य करने पर सिर-दर्द के लक्षणों में वृद्धि हो तो रोगी की ऐसी अवस्था में चिकित्सा करने के लिए ग्लोनॉयन औषधि की 6 या 30 शक्ति का उपयोग करना लाभदायक होता है।
लू लग जाने से सिर-दर्द, आग के पास बैठने से रोग हो जाना, सिर पर गर्मी बर्दाश्त न होना। इस प्रकार के लक्षण सिर-दर्द के साथ हो तो रोग को ठीक करने के लिए ग्लोनॉयन औषधि की 6 या 30 शक्ति का प्रयोग करने से अधिक लाभ मिलता है।
कैल्केरिया कार्ब :-
यदि किसी रोगी के सिर में खून जाम हो जाने के कारण से सिर-दर्द हो रहा हो और ऐसा महसूस हो कि सिर पर हाथौड़े से चोट लगी है, मस्तिष्क के अन्दर तपकन की तरह दर्द हो, मस्तिष्क के अन्दर हल्का-हल्का दर्द हो रहा हो। इस प्रकार के लक्षण से पीड़ित रोगी के रोग को ठीक करने के लिए कैल्केरिया कार्ब औषधि की 30 शक्ति का उपयोग कर सकते हैं। यदि इस प्रकार के लक्षण से पीड़ित स्त्री है और उसके दो मासिकधर्मो के बीच के समय में इस प्रकार का दर्द हो रहा हो और अधिकतर तब जब मासिकधर्म के बीच के समय में अधिक खून का स्राव हो रहा हो तब तो उसकी चिकित्सा करने के लिए कैल्केरिया कार्ब औषधि की 30 शक्ति हर दूसरे, तीसरे या चौथे दिन कुछ दिनों तक एक-एक मात्रा का प्रयोग करना उचित होता है।
साइलीशिया :-
अगर सिर में खून जाम होने के कारण से सिर-दर्द हो गया हो तथा ऐसा महसूस हो कि सिर पर हाथौड़े से चोट लगी है, मस्तिष्क के अन्दर तपकन की तरह दर्द हो, मस्तिष्क के अन्दर हल्का-हल्का दर्द हो रहा हो और इस प्रकार के लक्षण अधिकतर रात के समय में हो, सिर में ऐसी तपकन हो कि मानो सिर फट जाएगा, माथे पर गर्मी महसूस हो और वहां इतना भार महसूस हो कि दिमाग फट जाएगा ऐस महसूस हो तथा ऐसे सिर-दर्द पहले कई बार हो चुका हो तो साइलीशिया औषधि की 30 शक्ति का उपयोग करना चाहिए.......... 

Sunday, 1 March 2015

Deafness

बहरापन(Deafness).......
परिचय-
वैसे तो जन्म से ही बहरेपन का कोई इलाज नहीं है लेकिन अन्य कारणों से बहरेपन होने पर इसका इलाज किया जा सकता है। जो मनुष्य जन्म से ही बहरा होता है उसका उपचार करना मुश्किल होता है।
बहरापन तीन प्रकार का होता है-
1. कई प्रकार के रोगों के द्वारा पैदा हुआ बहरापन।
2.
जन्म से ही बहरापन होना।
3.
स्नायविक क्रिया की गड़बड़ी या शारीरिक कमजोरी के कारण उत्पन्न बहरापन।
बहरापन होने का कारण :-
बहरापन या ऊंचा सुनने के अनेक कारण हो सकते हैं- अचानक ऊंची आवाजें कान में पड़ने के कारण कान बंद हो जाना, माथे पर चोट लगना तथा कान में मैल जमा हो जाना। यह रोग अन्य कई कारणों से भी सकते हैं जैसे- कान पकना या किसी प्रकार की बीमारी होना आदि। कुनीन का अधिक मात्रा में सेवन करने के कारण भी यह रोग हो सकता है। इन सभी कारणों से रोगी बहरा हो सकता है या ऊंचा सुनने लगता है।
विभिन्न प्रकार के लक्षणों के आधार पर होम्योपैथिक औषधियों से चिकित्सा :-
शारीरिक कमजोरी के कारण उत्पन्न बहरापन :-
1. यदि शारीरिक कमजोरी के कारण बहरेपन का लक्षण उत्पन्न हुआ हो तो चिकित्सा करने के लिए फास औषधि की 3 शक्ति की मात्रा का प्रयोग करना लाभदायक होता है।
2. शारीरिक कमजोरी होने के साथ-साथ बहरापन स्नायविक की वजह से हो तो उसे ठीक करने के लिए चिनी-सल्फ औषधि की 3X मात्रा विचूर्ण का उपयोग करना चाहिए।
3. शारीरिक कमजोरी के कारण बहरापन हुआ हो और इसके साथ ही रोगी का कलेजा धड़कता हो तो उसका उपचार करने के लिए पेट्रोल औषधि की 3X मात्रा या आर्स औषधि की 3 शक्ति का उपयोग कर सकते हैं।
सर्दी लगने के कारण उत्पन्न बहरापन :-
1. यदि सर्दी लगने के कारण यह रोग हुआ हो और रोग नया हो तो उसकी चिकित्सा करने के लिए पल्स औषधि की 3 शक्ति की मात्रा का उपयोग करना लाभकारी होता है।
2. सर्दी लगने के कारण उत्पन्न बहरापन का रोग पुराना हो गया हो तो कैलिहाइड्रो औषधि की 3X मात्रा विचूर्ण या मर्क-बाई औषधि की 6X मात्रा विचूर्ण का सेवन करना चाहिए।
3. यदि बरसात की तर हवा लगने के कारण बहरापन का रोग हुआ हो तो रोग को ठीक करने के लिए डल्कामारा औषधि की 6 शक्ति की मात्रा का उपयोग किया जाता है।
4. ठण्डी सूखी हवा लगने के कारण उत्पन्न बहरेपन की चिकित्सा करने के लिए ऐकोन औषधि की 2X मात्रा का प्रयोग करना चाहिए।
5. सर्दी लगकर बहरापन हो और बात करने के साथ-साथ कम सुनाई दे रहा हो तो उपचार करने के लिए ब्रायो औषधि का उपयोग कर सकते हैं।
बुखार होने के कारण उत्पन्न बहरापन :-
1. बुखार के कारण उत्पन्न बहरेपन के साथ यदि सिर में चक्कर आ रहा हो तो इस रोग को ठीक करने के लिए बेल औषधि की 3 शक्ति का सेवन करने से अत्यन्त लाभ मिलता है।
2. शरीर में रक्तस्राव होने के कारण बुखार आकर बहरापन हो गया हो तो उसे दूर करने के लिए चायना औषधि की 3X मात्रा या एसिड-फास औषधि का उपयोग करना लाभदायक है। इस प्रकार के बहरेपन को ठीक करने के लिए पल्स औषधि की 6 शक्ति या सल्फ औषधि की 30 शक्ति का भी उपयोग कर सकते हैं।
त्वचा का कोई रोग दब जाने या कान का पीब निकलना बंद हो जाने के कारण उत्पन्न बहरापन इस प्रकार के लक्षण होने पर चिकित्सा करने के लिए सल्फर की 30 शक्ति, हिपर-सल्फर की 6 शक्ति या आरम की 3X मात्रा या 200 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए।
तालुमूल में जलन या उपचिन्हा फूलने के कारण बहरापन होना :
इस प्रकार के लक्षण होने के कारण उत्पन्न बहरापन को दूर करने के लिए मर्क-कोर की 6 शक्ति, मर्क-बिन-आयोड की 6X मात्रा, कैलि-हाइड्रो की 3X मात्रा या इसकी 30 शक्ति विचूर्ण या फिर बैराइटा-कार्ब औषधि की 6 शक्ति का प्रयोग करना चाहिए।
मस्तिष्क में गहरी चोट लगने के कारण बहरापन होना :-
इस प्रकार के लक्षण होने के कारण बहरापन उत्पन्न होने के साथ ही कान में सुरसुरी होने पर आर्निका औषधि की 3X मात्रा का उपयोग कर सकते हैं।

 कानों में अजीब-अजीब सी आवाजें सुनाई देना :-
1. इस प्रकार के लक्षण होने के कारण उत्पन्न बहरेपन तथा इसके साथ ही आवाजें कम सुनाई पड़ना। इस प्रकार के बहरेपन को दूर करने के लिए नक्स-वोम की 3 शक्ति का सेवन करना चाहिए।
2. यदि इस प्रकार के लक्षण होने के साथ ही सुनने की शक्ति तेज हो तो नेट्रम-सैलिसिलिकम औषधि की 3 शक्ति या इग्नेशिया औषधि की 6 शक्ति का प्रयोग करना लाभदायक होता है।
3. बहरापनहोने के साथ ही कान में गहरी या बायीं कर्णमूल ग्रन्थियों में थोड़ा दर्द हो तो बैप्टीशिया औषधि की 2x मात्रा का सेवन करना चाहिए।
अन्य उपचार :-
1. बहरापन होने की पहली अवस्था में मूलेन तेल की लगभग चार बूंद की मात्रा दिन में दो बार कान में डालें या रूई को इस तेल में तर करके कान में रखें।
2. स्नान करते समय कानों में पानी जाने से बचाना चाहिए।
3. कभी भी बच्चों के कान पर नहीं मारना चाहिए क्योंकि चोट लग जाने के कारण यह रोग उसे हो सकता है।
4. यदि कान में अधिक मैल जमा हो गया हो तो उसे निकाल देना चाहिए पर मैल ध्यान से निकालना चाहिए। Read More....

Friday, 27 February 2015

HOW TO GET RID OF LIQUOR

शराब छुड़ाने के उपाय l HOW TO GET RID OF LIQUOR
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शराब छुड़ाने के उपाय
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यदि कोई व्यक्ति बहुत ज्यादा शराब पीता है तो उसकी पत्नी मंगल या शनिवार को चरखा चलाए।जो व्यक्ति जरूरत से ज्यादा शराब का सेवन करता है तो उसकी पत्नी अपने पैरों के बिच्छुए को पानी से धोकर तथा शराब की बोतल में से थोड़ी सी शराब लेकर उसमें अपने बिच्छुए डाल दे। त्रयोदशी या पूर्णमाशी के दिन वह शराब निकाल कर दूसरी किसी शराब की बोतल में डाल दें। ऐसा पांच मंगलवार या शनिवार करने से शराब पीने की लत छूट जाती है।जो जातक शराब का सेवन अधिक करता है तो उसके लिए सात पताशे लेकर प्रत्येक पताशे में सरसों के तेल की दो-चार बूंदे डालकर फिर बताशे को हाथ से मसलकर घर से बाहर कहीं दूर जाकर फेंक दें। ऐसा ११ दिन लगातार करने से शराब पीने की लत छूट जाती है।
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जब शराब पीने की इच्छा हो तब किशमिश का १-१ दाना मुंह में डालकर चूसें किशमिश का शरबत पीने से भी दिमाग को ताकत मिलेगी और धीरे-धीरे शराब छोड़ने की क्षमता आ जायेगी l साथ ही इस मंत्र का जप करें : - " ॐ ह्रीं यं यश्वराये नमः " अथवा जब शराबी निद्रा में हो तो कुटुम्बी उसकी चोटी वाले भाग में देखते हुए मन ही मन इसका जप करें
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सोने-चांदी का काम करने वाले सोनारों के पास से शुद्ध गंधक का तेज़ाब यानि कि सल्फ़्युरिक एसिड ले आइए और आप जो शराब पीने जा रहे हैं उसके बने हुए पैग में चार बूंद यह तेज़ाब डाल दीजिए और जैसे सेवन करते है वैसे ही पीजिए और आप देखेंगे कि धीरे-धीरे आपकी शराब पीने की इच्छा अपने आप ही कम होने लगी है । इसी क्रम में आप एक दिन खुद ही शराब के प्रति अरुचि महसूस करने लगेंगे और पीना अपने आप छूट जाएगा ,ध्यान रखिए कि आप और कोई उपाय न करें बस खाने पर ध्यान दें कि स्वास्थ्यवर्धक आहार लें ।दूसरा यह कि शिमला मिर्च(कैप्सिकम) जो कि मोटी-मोटी होती हैं व खाने में तीखी नहीं होती व सब्जी बनाने में प्रयोग करी जाती हैं ,ले लीजिए और उनका जूसर से रस निकाल लीजिए व इस रस का सेवन दिन में दो बार आधा कप नाश्ते या भोजन के बाद करें । आप चमत्कारिक रूप से पाएंगे कि आपकी शराब की तलब अपने आप घटने लगी है और एक दिन आप खुद ही पीने से इंकार कर देते हैं चाहे कोई कितना भी दबाव क्यों न डाले । ये दोनो उपाय सन्यासियों के आजमाए हुए हैं जोकि लोगों की शराब छुड़ाने के प्रसिद्ध रहे हैं। आप यकीन मानिये कि इन सरल से उपायों से चालाक किस्म के लोग मजबूर शराबियों की आदत छुड़ाने की दवा के रूप में देकर लाखों रुपए कमाते हैं लेकिन आयुषवेद परिवार चूंकि सेवा के लिये कटिबद्ध है इसलिये हमारा उद्देश्य मात्र आपको सही सलाह देना है। यदि आपको कोई आयुर्वेदिक औषधि जो कि आयुषवेद की तरफ से बतायी गयी है और आपके क्षेत्र में नहीं मिल रही है तो हम उसे आपके आदेश पर बना कर मात्र उत्पादन मूल्य पर स्पीड पोस्ट से आप तक पहुंचा देते हैं।
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तो अपनी शराब में यह होम्योपैथिक दवा प्रति लीटर में बारह बूंद मिला कर रख लें और यकीन मानिए कि जो लोग आपके साथ शराब पीते हैं वे दो महीने में खुद ही शराब पीना बंद कर देंगे,दवा का नाम है SPIRTAS GLANDIUM QUERCUS . यह वही दवा है जिसका प्रचार कर-करके तमाम दवाखानों ने करॊड़ो रुपए कमा लिए हैं । हम किस दवा कए बाद जब शराबी की आदत छूट जाती है तो उसे दो माह तक सुबह शाम दो-दो चम्मच गुलकन्द(प्रवाल मिश्रित) खिलाते हैं और इसके बीस मिनट बा्द दो चम्मच अश्वगंधारिष्ट बराबर पानी के साथ देते हैं । इससे उसका खोया स्वास्थ्य वापस आ जाता है । आप भी इसी तरह से अपनी टूटती हुई कसमों से बच सकते हैं और यदि नियमित रूप से प्राणायाम करते हैं तो फिर तो सोने में सुगंध जैसी बात है ।

Son Birth

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अपनी इच्छानुसार संतान प्राप्त करने के उपाय.....
विवाह के बाद दंपति को संतान प्राप्ति की प्रबल इच्छा होती है। आज जब लडकियां भी पढ लिखकर काफी उन्नति कर रही हैं तो भी अधिकतर दंपतियों की दबे छुपे मन में पुत्र संतान ही प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं। यों तो संतान योग जातक की जन्मकुंडली में जैसा भी विद्यमान हो उस अनुसार प्राप्त हो ही जाता है फ़िर भी कुछ प्रयासों से मनचाही संतान प्राप्त की जा सकती है. यानि प्रयत्नपूर्वक कर्म करने से बहुत कुछ प्राप्त किया जा सकता है.
योग्य पुत्र प्राप्त करने के इच्छुक दंपति अगर निम्न नियमों का पालन करें तो अवश्य ही उत्तम पुत्र प्राप्त होगा। स्त्री को हमेशा पुरुष के बांई तरफ़ सोना चाहिए। कुछ देर बांयी करवट लेटने से दायां स्वर और दाहिनी करवट लेटने से बांया स्वर चालू हो जाता है. इस स्थिति में जब पुरूष का दांया स्वर चलने लगे और स्त्री का बांया स्वर चलने लगे तब संभोग करना चाहिये. इस स्थिति में अगर गर्भादान हो गया तो अवश्य ही पुत्र उत्पन्न होगा. स्वर की जांच के लिये नथुनों पर अंगुली रखकर ज्ञात किया जा सकता है.
योग्य कन्या संतान की प्राप्ति के लिये स्त्री को हमेशा पुरूष के दाहिनी और सोना चाहिये. इस स्थिति मे स्त्री का दाहिना स्वर चलने लगेगा और स्त्री के बायीं तरफ़ लेटे पुरूष का बांया स्वर चलने लगेगा. इस स्थिति में अगर गर्भादान होता है तो निश्चित ही सुयोग्य और गुणवती कन्या संतान प्राप्त होगी